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पाकिस्तान की एक अदालत ने शनिवार को 14 अरब रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और उनके बेटे तथा पंजाब के मुख्यमंत्री हमजा शहबाज की अग्रिम जमानत की अवधि 21 मई तक बढ़ा दी. प्रधानमंत्री और उनके बेटे के अभियोग में देरी हुई क्योंकि प्रधानमंत्री लंदन में हैं और सुनवाई में शामिल नहीं हो सके. लाहौर में संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) की विशेष अदालत ने शहबाज शरीफ की उस अर्जी को स्वीकार लिया, जिसमें उन्होंने शनिवार को व्यक्तिगत पेशी से छूट की मांग की थी, क्योंकि वह ‘अपनी चिकित्सा जांच के लिए’ लंदन में हैं.

लंदन की अपनी यात्रा के दौरान शहबाज ने पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज के नेता और अपने बड़े भाई नवाज शरीफ से मुलाकात की, और गठबंधन सरकार के समक्ष चुनौतियों के बारे में मार्गदर्शन मांगा. हालांकि हमजा अदालत में पेश हुए. एफआईए अभियोजक के अनुसार, अदालत में संदिग्धों की उपस्थिति के बिना मामले में अभियोग नहीं लगाया जा सकता है. अदालत के एक अधिकारी ने बताया, अगर प्रधानमंत्री शहबाज और पंजाब के मुख्यमंत्री हमजा अगली सुनवाई में अदालत में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं तो 21 मई को एफआईए के धन शोधन मामले में पिता और पुत्र दोनों को आरोपी ठहराया जा सकता है.

शरीफ परिवार ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है और आरोप लगाया है कि उनके खिलाफ मामले इमरान खान के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती सरकार द्वारा राजनीति से प्रेरित थे. शहबाज के वकील अमजद परवेज ने अदालत को बताया कि उनका मुवक्किल कैंसर से उबर चुका है और लंबे समय से उन्हें पीठ दर्द की समस्या थी. परवेज ने अदालत को बताया कि खान के नेतृत्व वाली पिछली सरकार ने उन्हें विदेश जाने की अनुमति नहीं दी थी, इसलिए उनकी चिकित्सकीय जांच नहीं हो पाई थी. उन्होंने अदालत को आश्वासन दिया कि शहबाज अगली सुनवाई में शामिल होंगे.

शुक्रवार को पदभार संभालने वाले नए एफआईए अभियोजक फारूक बाजवा ने कहा, ‘एजेंसी को अर्जी पर कोई आपत्ति नहीं है और अभियोग के लिए सभी संदिग्धों की उपस्थिति आवश्यक है.’ शहबाज और उनके बेटों- हमजा और सुलेमान पर एफआईए ने नवंबर 2020 में भ्रष्टाचार निवारण कानून और धन शोधन रोधी कानून की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था. सुलेमान फरार हैं और ब्रिटेन में रह रहे हैं.

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